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#लाश
102 poems
समुद्र मंथन
Madhur Dwivedi · 1 min read · 491 reads
हलाहल विष पीने के लिए नहीं है कोई महादेव इस बार, तो पकड़ लाये हैं वो किसी को अवतार
Others
रात
Amandeep Singh · 1 min read · 285 reads
मैं, खुद को ओढ़ कर लेटा हूँ ऐसे। लाश, कफन ओढ़े लेटी हो जैसे।
Drama
एक देह है एक रूह है !
S Ram Verma · 1 min read · 285 reads
दोनों बिछुड़ कर विधाता की लेखनी है !
Abstract
विरासत
Mahavir Uttranchali · 1 min read · 280 reads
एक अरसे से हृदय में उठे मुर्दा विचारों के यातना शिविर में प्रताड़ना की तरह तब कहीं।
Abstract
अवसाद
Akanksha Bhatnagar · 2 min read · 323 reads
जब हारा हो ये मन अगर तब एक सहारा होता है दे झूठी आस, लगे आकर्षित
Tragedy
तलाश
अजय एहसास · 1 min read · 243 reads
पहले ही खूबसूरती में थी कमी कहां पहना दिया ऊपर से जो मखमल लिबास और। वो देखती मुझको मैं समा जाता हूं उसमें दीदार न कर पाने से रहता निराश और।।
Others
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