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#लीन
4 poems
निस्तेज आशाएं
रिपुदमन झा "पिनाकी" · 1 min read · 289 reads
प्राण प्रतीक्षारत है कि कब हो जाए ब्रह्माण्ड में लीन।
Abstract
अलविदा बीस
Pratik Prabhakar · 1 min read · 211 reads
या पाएँगे नभ खुद के अब न कोई भय को सहेंगे
Tragedy
श्रीमद्भागवत - ५५; विभिन्न गतिओं और भक्तियोग की उत्कृष्टता का वर्णन
Ajay Singla · 1 min read · 190 reads
जो पुरुष घर में रहकर ही पालन करे गृहस्थ धर्मों का अर्थ, काम का उपभोग करे वो उन्ही का है अनुष्ठान वो करता|
Classics
शिक्षक दिन
Suresh Sonawane (प्रतिभाग्रज) · 1 min read · 112 reads
"शिक्षक दिन" न तो एकदिन, तो "अनुदिन" ।
Abstract