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#शंख
14 poems
मेरा बचपन....
इच्छित जी आर्य · 1 min read · 180 reads
जब भी सोकर उठता हूँ सच... बड़ा मन करता है ! इच्छित !
Drama
बिंदु
Himanshi Gupta · 1 min read · 246 reads
र शब्द का अर्थ व्यर्थ करती वो सुगंध सी चंदन में वो है, मंथन में वो है वो है कही चाँद - सितारों में भी होती बहुत सरल है, बिंदु - गोल सी, नाज़ुक सी
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मैया खेलन आ जाना
Prinkesh Jain · 1 min read · 258 reads
खेले गरबा डाडिया चारों ओर भक्ति भावना का हो रहा शोर।
Others
तमस की काली कारा तोड़
अच्युतं केशवं · 1 min read · 213 reads
हुई जड़ पर चेतन की विजय
Others
सार्थक दीपोत्सव
Vinay Singh · 1 min read · 267 reads
एक दीपक प्रेम की,
Inspirational
श्रीमद्भागवत - २३१ ;सुदर्शन और शंखचूड़ का उद्धार
Ajay Singla · 2 min read · 202 reads
चमकीली मणि शंखचूड़ से लेकर बलराम जी को दे दी उन्होंने।
Classics
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