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#शाल
5 poems
बेटियाँ
अंजना बख्शी · 1 min read · 308 reads
बेटियाँ धान-सी होती हैं पक जाने पर जिन्हें कट जाना होता है जड़ से अपनी
Others
बन फूल
Sujata Kale · 1 min read · 324 reads
हवा भी रूख बदलकर आ जाती है उसकी ओर, उसकी महक से महक भी महकने लगती है...
Abstract
हसरतें और भी हैं..!
निशान्त "स्नेहाकांक्षी" · 1 min read · 266 reads
हसरतें हैं.. तारों को गिन कर, बालपन में लौट जाने की..!
Inspirational
न जाने क्यों...!
surendra shrivastava · 1 min read · 355 reads
न जाने क्यों महसूस नहीं होती वो गर्माहट, इन ब्रांडेड वूलन गारमेंट्स में, जो होती थी दिन-रात, उलटे-सीधे फन्दों से बुनें हुए स्वेटर और शाल में
Classics
वो लड़की - 3
Prabhat Raghuvanshi · 1 min read · 293 reads
किसी की याद से फुरसत मिले तो मैं किसी और को सोचने का सोचूं
Abstract