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#शाह
8 poems
अख़बार
Mahesh Dube · 1 min read · 1.4K reads
हो गई है पढ़ चुके अखबार जैसी जिंदगी घर के कोने में पड़े हैं रद्दी वाले के लिए
Tragedy
हिन्दी कविता- काश्मीर कलंक कड़ी
Shyam Kunvar Bharti · 1 min read · 145 reads
कट गई कलंक कड़ी तीन सत्तर, कश्मीर अब आजाद हुआ। रोये छाती पीट बाल नोच, आतंकी धंधा बर्बाद हुआ।
Others
आफत की शोखियां
TANUJA NANDITA · 1 min read · 181 reads
आँखों से बुलाते भरे महफ़िल में साहिब आगाज़ नहीं देते झूठी आन के शाह में....
Romance
वक़्त समय
S R Daemrot (उल्लास भरतपुरी) · 1 min read · 230 reads
'उल्लास' ने लिख डाली बेशक, ये सारी बातें पुरानी हैं।
Inspirational
शह और मात दोनों मुकाम हो जाये
अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा बाबा · 1 min read · 227 reads
प्रकाश व अँधेरा प्रकृति के अद्भुत रुप सूर्य ,चंद्रमा ,सितारे हैं इसके स्वरूप।
Abstract
बुल्ले शाह
Anup Shah · 1 min read · 140 reads
ठिकाना तो सही लिखा था हमने, भूले हुए अलक़ाब सा बना दिया हमको।
Inspirational
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