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#सच
479 poems
सच सच है
सच सच है
Anantram Choubey · 1 min read · 13.5K reads
कुछ समयज़रूर मन मे अशान्तिरहती है
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इंसान झूठ क्यों बोलता है
Yogesh Suhagwati Goyal · 1 min read · 1.7K reads
नासमझ झूठ परोस अलगाव लाते हैं और समझदार, झूठ बोल, खुशियाँ बाँटते हैं।
Abstract
फर्क पड़ता है
Sandeep Gupta · 2 min read · 761 reads
फर्क इस बात से नहीं पड़ता इतना कि कोई सो रहा है, कोई जाग रहा है, पर इस बात से पड़ता है कि, जब सोए थे सब जागा कौन था।
Inspirational
डरती हूँ तो मोहब्बत के नाम से
dr vandna Sharma · 1 min read · 481 reads
मैं भी कितनी पागल हूँ डरती हूँ तो मोहब्बत के नाम से।
Drama
साहस
Surendra kumar singh · 1 min read · 140 reads
दो कदम आगे चलता झूठ के साम्राज्य के केंद्र की ओर।
Abstract
तू जान ले अब
Rinki Raut · 1 min read · 328 reads
इसलिए वो खेलते है अपने भाषण से छलते है तू जान ले अब
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