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#सभ्य
17 poems
सभ्यता
Pranshu Harshotpal · 1 min read · 396 reads
कहां वेदों की ऋचाएं, पुराण कभी हमने महाकाव्य रचा मिट्टी, ईंट फिर गगन तलक स्तंभों का
Abstract
क्योंकि मै इंसान हूँ
Asha Gandhi · 1 min read · 238 reads
मै मूक ,बधिर बना अपनी राह पर चलता हूँ इंसानियत पर हैवानियत का राज देखता हूँ। अपनी
Tragedy
पेट या श्मशान
Nitu Arora · 1 min read · 260 reads
दिल पत्थर का होता है तभी तो ऐसा खाना पचता है
Others
हम बदलेंगे
VIVEK ROUSHAN · 2 min read · 144 reads
माहिर हैं वो लोग सूरत बदलने में माहिर हैं वो लोग तक़दीर बदलने में ।
Tragedy
मानव आकाश की ओर ,मानवता पाताल की ओर
divya mahindru · 1 min read · 214 reads
मानव के साथ मानवता जब हाथ में हाथ डाल चलेगी ! तब सही अर्थो में सभ्य सांचे में ढलेगी !
Abstract
सभ्य / असभ्य
Rudra Prakash Mishra · 1 min read · 304 reads
उस परम सत्ता (प्रकृति )से, छेड़-छड़। और, हम होते गए, असभ्य।
Abstract
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