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#सार
75 poems
समय
विनोद महर्षि'अप्रिय' · 1 min read · 225 reads
व्यापारी सहता बाजार की मार पैसे गिनता बस उसी में है सार फिक्र वक्त की यहां करता कौन है
Inspirational
परिभाषा
Dr.Rashmi Khare"neer" · 1 min read · 179 reads
क्या यही परिभाषित करता है प्यार क्या है ?
Drama
शायद अब मैं बूढ़ा हो गया
paramjeet singh · 1 min read · 194 reads
जाने कब मैं बड़ा हो गया अपने पैरों पर खड़ा हो गया, वक्त का साया ऐसा था न धेला था न प
Tragedy
ॐ में बसा है ब्रह्मांड
SIJI GOPAL · 1 min read · 503 reads
शीतल गंगा जटा में, ज्वाला भरे नेत्र है। मस्तक पर चन्द्रमा, कैलाश पुण्य क्षेत्र है।
Abstract
सीता की अग्निपरीक्षा कब तक
Meena Mishra · 1 min read · 349 reads
अपनी कीमत तुम पहचानो तेरी धरती तेरा ये जग फिर क्यों हो ये अग्निपरीक्षा
Inspirational
तू बटुए की खनकार
Ravi Purohit · 1 min read · 178 reads
तू है तो सांसें हैं मेरी वरना जीवन निस्सार है।
Drama
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