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#हठ
9 poems
जी का जंजाल
Praveen Gola · 1 min read · 280 reads
बाल मनोविज्ञान, एक ऐसी पहेल, ज़िसे बुझाना, जी का जंजाल।
Drama
पिया मिलन की आस
Shubhra Varshney · 1 min read · 520 reads
अब ना करूँ हठ ना करूँ मनुहार पड़ बौछार हुई तृप्त हृदय की पुकार।
Abstract
अस्तित्व और एहसास
Utkarsh Srivastava · 1 min read · 195 reads
जरुरी नहीं ख्वाब, मिलते रहे मंजिल में होने, कई काम है।
Abstract
देवी या दानवी,मानव कभी नहीं
अच्युतं केशवं · 1 min read · 277 reads
स्त्री तू नहीं है मानव तुझे मानव नहीं माना जा सकता हम हमारा समाज तुझे दे रहा है
Abstract
सच्चा मोती
Phool Singh · 1 min read · 186 reads
धरा फोड़ जैसे अंकुर निकलता व्यक्तित्त्व ज्ञान से निखरता हो।
Crime
आजकल वे कटे से रहते हैं
Satish Chandra Pandey · 1 min read · 187 reads
नैन अपने भी हठीले से हैं हर घड़ी उन में डटे रहते हैं।
Classics
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