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#हूं
73 poems
मैं सक्षम हूँ
PRATAP CHAUHAN · 1 min read · 203 reads
मैंने मानवता को जिंदा रखा है फिर भी, मैं व्यर्थ के आरोप जहन में लपेटे हूँ।
Abstract
मैं कौन हूंँ मैं क्या हूं
राजेश "बनारसी बाबू" · 2 min read · 441 reads
हर घड़ी हर पहर खुद को ढूंढता हूंँ मैं हर अक्श में हर पहर में खुद से पूछता हूंँ मैं।
Others
रु ब रू
manisha sinha · 1 min read · 158 reads
गुमनाम ख़यालों की नज़्में बना मैं गुनगुना रहा हूँ , बड़ी अरसों के बाद खुद से गुफ़्तग
Others
शहर और गॉंव की तकरार
Lakshman Jha · 1 min read · 291 reads
"मैं शहर हूँ मैं गांव से बहुत आगे निकल चुका हूँ , गांव को तो मैं हजार कदम पीछे छो
Others
बन जाती हूँ
Divik Ramesh · 1 min read · 1.2K reads
बन जाती हूँ ।
Others
खुश नही हूं...
Shambhu Amlvasi · 1 min read · 6.9K reads
खुश नही हूं...
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