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#31dayswritingprompts
1702 poems
खेल खेलें हम
Rachna Vinod · 1 min read · 272 reads
आजा फिर से घर घर खेलें गुड्डे गुड्डी का ब्याह रचाएं।
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परछाइयां
Dr. Anu Somayajula · 1 min read · 338 reads
अंधेरे बंद कमरों में उतर आती हैं परछाइयां, दीवारों से रेंगती हुई।
Abstract
भूख
Nand Kumar · 1 min read · 149 reads
भूख अजब है बीमारी, लगकर विवेक खा जाती है। उल्टे सीधे सारे जग के, कामो को वह करवाती
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घर या रास्ते
Rachna Vinod · 2 min read · 325 reads
मैं यह करुं वो करुं, ऐसे रहूं या वैसे रहूं।
Others
बेनाम बाशिंदे
Rachna Vinod · 1 min read · 337 reads
प्यार में बंधे बेनाम बाशिंदे चलते-फिरते इल्ज़ाम सहते, ताने सहते।
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उम्र में फ़र्क
Rachna Vinod · 1 min read · 373 reads
मां की गोद में बचपन खेला बाप के कंधे से दुनिया को देखा।
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