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897 poems
एब्स्ट्रैक्ट आर्ट
Hemant Parihar · 1 min read · 7.1K reads
मेरे सीने पर एक रात अपनी उँगलियों से एक बेतरतीब - सी पेंटिंग बनाई थी तुमने...
Drama
कोई नहीं हमारा
Vijay Kumar उपनाम "साखी" · 1 min read · 465 reads
गंदगी से भरी जग की महफ़िल में, तूने ही प्रभु मुझे फूल सा सँवारा है।
Abstract
रिश्ता ही तो है
Suresh Koundal · 1 min read · 202 reads
मजबूरियों का जिम्मेदारियों का क्या फर्क रिश्ता ही तो है।
Abstract
प्रेम-वियोग
Yashpal Singh · 1 min read · 24 reads
हार और जीत दिन और रात शब्द हैं, एक दूसरे के पूरक!
Romance
क्या तुम वही हो
Akanksha Gupta · 1 min read · 311 reads
इस दुुनिया के आगे हार गए थे तुम क्या तुम वही हो।
Abstract
मेरी चाह
सागर जी · 1 min read · 202 reads
मेरा सम्मान बचा रहे, कुछ मिले भी, या नही।
Abstract
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