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#Feminism
13 poems
न कहना मुझे
Anubha Jain · 1 min read · 13.6K reads
न कह देना के ख़ुद को भूल जाओ ,के मेरी पहचान ही मेरी ताक़त है,अपना सको तो अपनाना मेरे वज़ूद को,के इसी में छिपा मेरे त्यागा और मेरी चाहत है। …
Others
---एक बेटी का दर्द---
Saumya Singh · 1 min read · 24.3K reads
इस बेटी को आखिर न्याय देने वाला कौन है।
Tragedy
"अपना चौकीदार"
Poonam Godara · 1 min read · 24.2K reads
अपने बालों को खुला छोड़ना खुद के लिए इशारा लगता है तुम्हें??
Tragedy
क्यों भूल गए तुम?
aabha Kapoor · 1 min read · 7.5K reads
क्यों भूल गए तुम? जब कर रहे थे तुम दुष्कर्म,
Crime
लाचारी
Preeti Rathore · 1 min read · 230 reads
अपने खिलाफ हुई साजिशों के आगे पर अब वो दुर्गा है अपने दुश्मनों के आगे।
Classics
ये
KM Diksha Bisht · 1 min read · 280 reads
की उगंली न उठे उसके संस्कारों पर बुरी न समझे कोई उसकी नियत को।
Crime
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