StoryMirror - Read, Write, Share & Repeat#FireWaterAirElementsNature
186 poems
- तीन तत्व– आग, हवा और जलAshna Choudhary · 1 min read · 14.1K readsहर ज़माने के साथ में, मैं उड़ता हुआ आता हूँतूफान हूँ मैं, महज़ आँधी ना समझनाबहती हवा हूँ मैं, भिगी ज़िदगानी ना समझनाआसमानी हूँ मैं, इंसानी ना समझनातुम्हारी ज़िंदगानी हूँ मैं, खुद को खुदाई ना समझनाAbstract
- क्यों खुदा को दोषी बना दियाAtul hindustani · 1 min read · 6.9K readsकुचल हरे पौधों को तुमने
पुष्प की अभिलाषा को मिटा दिया...Drama
- हवा - हवाPinky Ashku · 1 min read · 1.5K readsगाती हुई यह हवा
लो चली
लो चली यह हवा !Drama
- शब्दों की भीड़Akash Agrawal · 1 min read · 240 readsमैं शब्दों की भीड़ में उसे ढूँढता रहा,
वो निःशब्द, इक आवाज़ सा मुझे पुकार रहा था।Abstract
- प्रकृति सौन्दर्यNeetu singh Anjali · 1 min read · 6.9K readsनदियों की, झिलमिल-सी धारा, टकराती इक से, इक धारा...Drama
- फ़ैसला सिर्फ़ हवा करती हैKomal Upadhyay · 1 min read · 6.3K readsहवा...Drama
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