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#Fire
6 poems
कुछ तो गलत है
Nitish Sharma · 1 min read · 197 reads
आग - सी सीने में जल रही...
Drama
तीन तत्व– आग, हवा और जल
Ashna Choudhary · 1 min read · 14.1K reads
हर ज़माने के साथ में, मैं उड़ता हुआ आता हूँतूफान हूँ मैं, महज़ आँधी ना समझनाबहती हवा हूँ मैं, भिगी ज़िदगानी ना समझनाआसमानी हूँ मैं, इंसानी ना समझनातुम्हारी ज़िंदगानी हूँ मैं, खुद को खुदाई ना समझना
Abstract
इश्क ऐसी एक आग है
Praveen Gola · 1 min read · 853 reads
मैं तमाम उम्र तुझको अपनी नजरों में कैद कर लूँ !
Romance
मैं नारी हूँ
Anu Gangwal · 1 min read · 258 reads
अगले ही पल चल पढ़ती हूं मंज़िल को पाने के लिए खुद में खुद का विश्वास जगाने के लिए।
Inspirational
काव्याग्नि
Kavi Vijay Kumar Vidrohi · 1 min read · 20.4K reads
तांडवजन्मा प्रलयअंश हूँ केवल रचनाकार नहीं , देशद्रोह के निजपुत्रों का कर सकता सत्कार नहीं .............. -विद्रोही
Others
शब्दों की भीड़
Akash Agrawal · 1 min read · 240 reads
मैं शब्दों की भीड़ में उसे ढूँढता रहा, वो निःशब्द, इक आवाज़ सा मुझे पुकार रहा था।
Abstract