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7 poems
माँँ कसम
Tarkesh Kumar Ojha · 1 min read · 1.5K reads
माँँ कसम ! क्या गरम है रे भाई !
Comedy
पता ही नही चला
Arun V Deshpande · 1 min read · 1.3K reads
मायूसी दिल की कायम है पता ही नही चला !
Drama
वृक्ष हमारी रक्षा करते
Dhananjay Kaushik · 1 min read · 7.2K reads
वृक्ष हमारी रक्षा करते हम उनको ना बख़्शा करते। तिल-तिल जलते सूर्यताप में वृक्ष किनारे सुस्ता करते।
Drama
कविताएं और दहेज
नवल पाल प्रभाकर दिनकर · 1 min read · 7.2K reads
मैं बेकार हूँ दहेज नही दे सकता यही तो दुराचार है ।
Drama
आबादी
Sanjay Raghunath Sonawane · 1 min read · 7K reads
जनसंख्या दिन मनाना है जनसंख्या को रोकना है...!
Drama
शासक बाबू
Goldi Mishra · 1 min read · 201 reads
कुर्सी के पीछे है सब भागे, लालच और लोभ में सब बने गूंगे और अंधे,।।
Tragedy
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