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5 poems
मैं सोया रहता हूँ
Pratik Kamble · 1 min read · 13.8K reads
जब लोकतंत्र का खून हो रहा होता है मैं सोया रहता हूँ...
Drama
शोले की स्याही में सत्ता की सूरत
Ravindra Lalas · 2 min read · 300 reads
शोले की स्याही मे सत्ता की सूरत, समझे सयाने, नासमझे मूरख।
Abstract
राजा जी और ग़रीब
Himanshu Sharma · 1 min read · 218 reads
उन्हें राजा जी बनाया हमने, सहेंगे कि ये हमारी ख़ता है !
Abstract
चुनाव आ गए
Goldi Mishra · 2 min read · 298 reads
कुर्सी के पीछे नहीं देश सेवा की ओर भागो, मुद्दे मत खड़े करो, नए देश की नई तस्वीर र
Classics
बस नफरतें बिकती है ।
Goga Khullar · 1 min read · 303 reads
समझ गया था कि आज यहां, बस नफरतें बिकती है बस नफरतें बिकती है।
Abstract