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#Religiousriots
7 poems
मज़हब या इंसान
Prateek Tiwari (तलाश) · 1 min read · 6.7K reads
ईश्वर, अल्लाह, हैं दोनो हैरान था मज़हब बनाया या इंसान...?
Drama
इंसानियत ........
Shashikant Shandile · 1 min read · 7.3K reads
इंसानियत की बाते तो हर चौराहे होती है दिल ही दिल में अपना ही धर्म रटे है लोग !
Drama
कभी दिल्ली बताये राज़ दावत कौन करता है
Himanshu Bhawsar · 1 min read · 20.5K reads
हवस की राह चलते है, मुहब्बत कौन करता है, फरेबी ज़िन्दगी में आज चाहत कौन करता है गरीबों के नसीबों में, मयस्सर भी नहीं रोटी, कभी दिल्ली बताये राज़ दावत कौन करता है
Others
ये अपने ही भाई हैं
Anuradha Sharma · 1 min read · 293 reads
इक जूनून की रात ये बियाबान सुबह लायी है, गौर से देखो, ये अपने ही भाई हैं।
Tragedy
मेरा ये ख्वाब है
Pandit Dhirendra Tripathi · 1 min read · 331 reads
मेरे ये ख्वाब है कि मैं मक्का मदीना देखूं आदमजात को होते सीन पासीना देखूं।
Others
सिया राम
Nitu Mathur · 1 min read · 231 reads
ऊंच नीच का भेद भूलकर , संवारे अपने भी करम।
Inspirational
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