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#Riots
4 poems
इंसानियत ........
Shashikant Shandile · 1 min read · 7.3K reads
इंसानियत की बाते तो हर चौराहे होती है दिल ही दिल में अपना ही धर्म रटे है लोग !
Drama
मज़हब या इंसान
Prateek Tiwari (तलाश) · 1 min read · 6.7K reads
ईश्वर, अल्लाह, हैं दोनो हैरान था मज़हब बनाया या इंसान...?
Drama
कभी दिल्ली बताये राज़ दावत कौन करता है
Himanshu Bhawsar · 1 min read · 20.5K reads
हवस की राह चलते है, मुहब्बत कौन करता है, फरेबी ज़िन्दगी में आज चाहत कौन करता है गरीबों के नसीबों में, मयस्सर भी नहीं रोटी, कभी दिल्ली बताये राज़ दावत कौन करता है
Others
ये अपने ही भाई हैं
Anuradha Sharma · 1 min read · 293 reads
इक जूनून की रात ये बियाबान सुबह लायी है, गौर से देखो, ये अपने ही भाई हैं।
Tragedy