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6 poems
कद्रदान
Nitin Sharma · 1 min read · 1.2K reads
कद्रदान !
Drama
मंजिल और राह
नवल पाल प्रभाकर दिनकर · 1 min read · 6.9K reads
जो विरां लगती थी राहें आसान हुई हैं वो तुमसे...!
Drama
मेरी माँ
Pinky Dubey · 1 min read · 544 reads
जिसने इस धरती पर अपने बच्चे की हर गलती पर भी उसको माफ़ कर सीने से लगाया है।
Classics
नारी है वो
Shraddha Jain · 1 min read · 322 reads
"खुशी" थोड़े समय के लिए संतुष्टि देती है और "संतुष्टि" हमेशा के लिए खुशी देती है।
Abstract
एक नई सुब्ह
DR ARUN KUMAR SHASTRI · 1 min read · 135 reads
कर दिल से इसका स्वागत प्राणी प्रभु चरणों में ध्यान लगा।
Classics
कातिल
Khushboo A. · 2 min read · 876 reads
तेरे लंबे बाल और गुलपोशी के चर्चे हर जगह थे खुबसूरती बेहद थी तुझमें पर पहरे हर जगह थे.
Tragedy