by Pratibha Shrivastava Ansh ✓ · 18 Mar 2019
मैं भ्रमित क्योंकि अब पहचान लेती हूँ उस कुरूपता को जो सुंदरता की आड़ में रहता है उस लालच को जो इंसान के भीतर पनपता है
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