by Swaty Singh ✓ · 30 Aug 2017
कसमें खायी थीं जिन्होंने आख़री दम तक साथ निभाने की जनाज़ा उठने भर की देर थी बस ज़हमत भी न थी उनमें मेरा मातम मनाने की।
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