120Log inSign up
by Supriya Devkarआँखें
Details

मन की आँखें खोलकर

देखो इस दुनिया को जरा 

हर कदम पर अलग नजारा

खुदको बचाए रखना जरा 


यहा हर कोई खुशी चाहे 

अपनी बात को मनवाए

घुटघुट कर जिने से भला

खुद के अस्तित्व को जगाए


उतार दो आखोंकी पट्टी 

समझ जाओ यह मोहमाया 

मिठी वाणी बोलकर लोगोने 

सोचो कैसे तुम्हे है फसाया


अब सभंल जाओ तुम

यहा रूप बदलते है सब 

पता ना चलेगा राहमे

फस गये तुम कब


उठो चेतो खुदको बनाओ 

मजबूत जैसे हो चट्टान

हर मुश्किल को पार करना 

हो जाए तुमको आसान 


रचना है इतिहास अब 

दिखाना है मन का जोश

खुदको साबित करके 

उड़ाने है सबके होश।

Loading comments…