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#aatma
3 poems
मेरी अंतरात्मा’
Indu Singh · 1 min read · 14.3K reads
जो मुझको सदा राह दिखाती मोहमाया भरी दुनिया में भटकने से भी बचाती
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उग रहे हैं आत्मा में वन कटीले
Anshul Jain · 1 min read · 6.8K reads
दुख मेरा यह है, मुझे सच बोलना हैहाथ मे लेकिन कोई दर्पन नहीं हैकौन समझे दुख में डूबी खनखनाहटहथकड़ी है हाथ में , कंगन नहीं है
Others
इंसान है कहीं ?
Yuvraj Gupta · 2 min read · 308 reads
यह लिखावट नहीं, वह खुद पूछ रही थी "सच में क्या... हमारे बीच इंसान कहीं है ?"
Tragedy