by Aviral Raman ✓ · 19 Aug 2018
'जब अपनी कड़वी ज़ुबा से मानव जाति को तुम भड़काते हो, भाईयों को अपने भाईयों से ही लड़वाते हो।' सोचने पर मजबूर करती कविता।
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