by Bhavna Thaker ✓ · 22 Mar 2019
कुछ हसरतों के धागों की चद्दर बुनी नक्काशी भी की जज़्बातो से रेशमी सिरे जोड़कर सिनी चाही एक तंग चोली तंग हाथ की तरह उधड़ गई
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