by Kuhu jyoti Jain ✓ · 7 Feb 2019
तुम सामने खड़ी हो मेरे और तुम्हें छू भी न पाया हूँ आलिंगन को तरसती मेरी बाँहे तुम्हें तो कह भी न पाया अब तक
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