
असहिष्णुता का विलाप करने वाले लोग कौन थे? क्या हम-आप थे. नहीं थे. क्योंकि हमें पेट की रोटी से फुर्सत कहाँ? पेट भरने के बाद धर्म-अधर्म सब दिखता है पर पेट खाली हो तो सबसे बड़ा धर्म पेट ही होता है. ऐसे शब्द और इसकी मार्केटिंग करने वाले सिर्फ़ स्वार्थसिद्धि और वोट बैंक वाले लोग ही होते हैं. यह सबको समझना चाहिऐ.
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