
क्लासिक व्यंग्य/ वर्तमान भारत की तथा-कथा. आजादी के पहले और आजादी के बाद महात्मा गाँधी के योगदान को विस्मृत करना हमारी अक्षम्य भूल होगी ।बापू ! हमारे उत्सर्ग और संघर्ष की कहानी हैं ; इसीलिए तो वे राष्ट्रपिता कहलाये। "बुरा मत कहो--बुरा मत सुनो--बुरा मत देखो"
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