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#bewareofyourculture
290 poems
☆ क्या हम बदल रहे? ====
Rajiv Jiya Kumar · 1 min read · 323 reads
मुुुुठ्ठी में रेत की भांति फिसलते जा रहें हैं, लगता है हम बदल रहें हैं।
Abstract
फैशन की दौड़
नवल पाल प्रभाकर दिनकर · 1 min read · 7K reads
कहां अभी स्वतंत्र हुए हम आजादी के इस दौर में।
Drama
बदलते चलन
Dr. Prakhar Dixit · 1 min read · 1.5K reads
मौन चौक के पनघट देखे गगरी कलशा रहा नहीं।
Drama
युद्ध का आह्वान
Mr Kaushal N Jadav · 1 min read · 528 reads
रामायण का राम हूँ मैं युद्ध का परिणाम हूँ,
Inspirational
धरोहर
Goldi Mishra · 1 min read · 427 reads
ऊंची ऊंची मिनारे सुना रही है बीती कहानियां, हमारी सभ्यता की महक से गुलशन है आज भी ये
Inspirational
वक़्त के साथ
Javed Ali · 1 min read · 11.6K reads
वक़्त को ना पकड़ सका कोई वक़्त को ना थाम सका!
Abstract
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