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Poem · Others

भट्टी

by Vishalgorana ✓ · 28 Aug 2017

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हड़बड़ाहट में मैं अपने स्वप्न डाल देता हूँ भट्टी में, अनेकों स्वप्न झोक देता हूँ, आह!.... भट्टी में फिर आग है, पहले से ज्यादा गहरी,

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