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Poem · Fantasy

बरसो ना

by Shailly Shukla ✓ · 5 Aug 2018

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टूटे ख़्वाबों के शीशे फिर जुड़ने लगे हैं, लू की थपेड़ों से राहत मिली है, देखो ज़रा फिर से ठंडी हवा चली है !

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बरसो ना · StoryMirror