by Atul Balaghati ✓ · 7 Aug 2017
मुझे डर है, कहीं फूट न जाऐं मज़हबी दंगो में दबकरफिर भी कहाँ जाऐगा जात पात के चंगुल से बचकरक्या, मानव भेद-भाव छोड़ पाऐगा क्या, आसमाँ में उड़ पाऐगा!
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