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Poem · Others

"च"

by Nikhil Sharma ✓ · 5 Jun 2017

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"च" से वो "चेतावनी" जो कुदरत हमको देती है"च" से ही वो "चीत्कार" जो एक अबला देती है "च" से ही वो "चरक" जिसने दिया आयुर्वेद "च" से ही वो "चमड़ी" जिसकी "चमक" में हम भूले जीवन के भेद

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