
इनसे मिलने से पहले सोचता था कि ये शायर, लेखक और कवि क्या बकवास लिखते है। अपने लेख को पढ़ाने के लिए किसी भी हद तक चले जाते है। एक साधारण सी लड़की की ख़ूबसूरती की तुलना चाँद, फूल, नदी, किरणे न जाने किस-किस से कर देते है। कहाँ वो सारी खूबसूरत चीज़े और कहाँ एक साधारण सी लड़की। पर जब उसको देखा तब लगा की वे झूठ नहीं कहते थे बस ये कहना भूल गए थे की उसके चेहरे में खुद का नूर दिखता है। हाए अल्ला वो सच्ची में बेहद खूबसूरत है.
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