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1838 poems
नित नई चुनौतियां
Archana Nema · 1 min read · 7.3K reads
नित नई चुनौतियां नित नए आयाम । सरपट भागती ज़िंदगी नहीं कहीं आराम ।
Drama
दिल-ए- जज़्बात
Kinju Desai · 1 min read · 283 reads
हालत कुछ ऐसे हैं मेरे, कि शब्दों मे बयाँ नहीं होते।
Tragedy
ये कैसा पागलपन
Vaidehi Singh · 1 min read · 251 reads
खुद, इन्सान से बेजान चीज़ बन जाने का, ये कैसा पागलपन ?
Abstract
पीर नसीर साहब की गज़ल
MS Mughal · 1 min read · 177 reads
सर ए तूर हो सर ए हश्र हो हमे इंतजार कबूल है वोह कभी मिले वोह कहीं मिले वोह कभी सही ।
Others
उसने कहा था
Aditi Sharma · 1 min read · 284 reads
फिर भी कुुुुुछ अनजान बने हुए उस रास्तेे पर दोबारा जा पहुँचे।
Others
हिंदी माथे की बिंदी
VIPIN KUMAR TYAGI · 1 min read · 150 reads
हिंदी हमारे माथे की बिंदी ,हिंदी हमारे सम्मान की प्रतीक, हिंदी हमारी मातृभाषा।
Inspirational
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