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by उर्वील सिंहचूम लेते हो मेरे होंठ
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चेहरे पर रौशनी तुम्हारी,

मेहताब की तरह,

आँखों में नशा तुम्हारी,

शराब की तरह।


चूम लेते हो मेरे,

होंठों को शायरी बनकर,

चुभते भी हो कभी-कभी,

गुलाब की तरह।

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