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by ज्योति किरणदेश प्रेम
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देश प्रेम से बढ़कर जग में,

प्रेम न कोई दूजा है।


मेरे लिए मेरा वतन है ईश्वर, 

वतन ही मेरी पूजा है।


होंगे हम क़ुर्बान वतन पर,

आँच नहीं आने देंगे_


सामने गर आएगा दुश्मन, 

ज़िन्दा नहीं जाने देंगे।

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