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धरती की पुकार
Poem · Abstract

धरती की पुकार

by Mukund Krishna ✓ · 19 Jul 2019

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तू नाश करे - तू विनाश करे और मैं सह - सह चुप रह जाऊं तू मेरा शोषण करता रहे और मैं बैठी हां पछताऊं तू धूप में जब भी चलता है पेड़ों की छाया देती हूँ

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धरती की पुकार · StoryMirror