by Rishu Raheja ✓ · 1 Sept 2017
फिर भी ना जाने क्यों दुसरों की हुक़ूमत हम झेलते हैं?इन सबको छोड़कर देखू तो लगता है,माँ के आँचल में कैद रहना ही सच्चा रह गया...............
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