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#dowry
8 poems
इंसांं भटकता जा रहा
दीक्षा सविता · 1 min read · 6.9K reads
इंसान भटकता जा रहा...।
Drama
कविताएं और दहेज
नवल पाल प्रभाकर दिनकर · 1 min read · 7.2K reads
मैं बेकार हूँ दहेज नही दे सकता यही तो दुराचार है ।
Drama
हाइकु
Upendra Pratap SIngh · 1 min read · 39 reads
बर्न यूनिट- मृत गर्भा बेटी के पार्श्व में पिता!
Abstract
गरीब की बेटी
नवल पाल प्रभाकर दिनकर · 1 min read · 2K reads
धन के भक्षी लोभी भेडि़ये से तंग आकर वह जल मरी श्मशान पहुंचने से पहले ही चिता बन घर में जल जाती है।
Crime
दहेज़
sonam prajapati2013 · 1 min read · 7.2K reads
समाज की ये कैसी कुरीतियां हैं लक्ष्मी का मान दिया बेटियों को शास्त्रों ने उसी लक्ष्मी स्वरुप बेटी को समाज चंद रुपयों में तो
Drama
बदले सुर शहनाई के
Nitu Mathur · 1 min read · 610 reads
शहनाई की आवाज़ ,लिखने चली नई कहानी मंगल परिणय की साक्षी बनी ,शाम ये सुहानी।
Tragedy
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