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Poem · Comedy

एजुकेशन सिस्टम

by Rahul Sharma ✓ · 14 Aug 2017

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धर्म गुरु भूल गया है, पैसो के जाल में फस गया है।। मत पूछो विडंबना केसी है शिष्य भी खरीदार बन गया है।।

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