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Poem · Abstract

एक कली... बेज़ुबानी...

by Prapti Sharma ✓ · 12 Feb 2019

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ना कंपन थी इस भूमि पर, ना मेघों में कोई ऐब ही थी; यूँ तो पर्वत भी अडिग, शांत से थे, ना आहट ही कोई प्रलय की थी !

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एक कली... बेज़ुबानी... · StoryMirror