- तुझकोHimanshu Sharma · 1 min read · 367 readsबड़ी हसरत से देखती है ये नज़र तुझको,
देख के रुक जाता घड़ी का गज़र तुझको!Abstract
- तेरी दास्तानेंHimanshu Sharma · 1 min read · 226 readsमहकते गुलशन से, ख़ुश्बू चुरानी है,
तेरी दास्तानें मुझे, हर-सू सुनानी है।Romance
- संगीत में बसा अनंत शून्यShamim Shaikh · 1 min read · 493 readsइन संगीतों को सुनने से मिलता अनंत सुकून है
मधुर संगीत में बसा अनंत शून्य है!Abstract
- एक प्यासा लम्हा रीत गयाAnkur Govind · 1 min read · 7K readsचलते -चलते क्यों लगता है, एक अरसा यों ही बीत गया लगता है पानी के घट से ,एक प्यासा लम्हा रीत गया
झड़ते पत्ते यह कहते है, मौसम का हाल बदलता है पर रोज़-रोज़ यों लगता है, सूरज तो पीछे चलता है
तुम गऐ तुम्हारे साथ गया, उस प्यारे बचपन का आँगनअब फ़ीका -फ़ीका सा, लगता, जीवन का हर कोई बंधन
तेरे काँधे पर सर रखकर, हाँ कितनी रातें काटी हैं सन्नाटों में यह लगता है यह घड़ियाँ हमने बाँटी हैं
अब नई कोपलें खिलती है,तो सकुचाता है मेरा मन आती है कई बहारें भी ,पर ना जाता यह सूनापन Others