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5 poems
आज की मीडिया
Abhimanyu Kumar · 1 min read · 121 reads
सब वहीं देखना चाहते जो तुम दिखाते हो , नेता कम थे जो अब तुम भी हमें बेवकूफ़ बनाते हो
Tragedy
गवाही इतिहास की
Prasad Rajan Kr · 1 min read · 304 reads
विजयी योद्धाओं के पराक्रम का, गुमनाम मेहनतकशों के श्रम का।
Abstract
दिखावा
yogita singh · 1 min read · 260 reads
ना ना ये बिल्कुल ना सोचना उदास ना हूं मैं।
Abstract
पहचान साथियों की
Pratik Tarsekar · 1 min read · 235 reads
नाश्ता मिले तो समझो परायापन। खाना मिले तो अपनों का अपनापन।।
Abstract
पत्रकारिता
Himanshu Sharma · 1 min read · 239 reads
मुर्दा ख़बरों ने ज़मीर को जकड़ के है रखा, ये मुर्दा खबरें ज़हन में हर ज़िंदे के बैठी ह
Abstract