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#ghar
5 poems
मेरा आशियाना
Dr. Shubhra Maheshwari · 1 min read · 285 reads
जब मेरा अपना आशियाना था, हर तरफ मेरा ही फसाना था।।
Fantasy
इसी घर के अंदर कभी
Pradnya Kulkarni · 1 min read · 165 reads
और अनगिनत सुनहरी यादों को समेटे रखा है इस छोटे से ताले ने।
Fantasy
परिंदा लौटने लगा है...
YOGESH KUMAR SAHU · 1 min read · 194 reads
देने लगा है दस्तक शाम अब दरवाजे पर, देखो परिंदा घर को लौटने लगा है।
Abstract
कहां घर रे तेरा
GOPAL RAM DANSENA · 1 min read · 190 reads
करुण क्रंदन हर घर रे तेरा इंसान कहाँ घर रे तेरा I
Abstract
कितना है प्यार तुझ में माँ
Arshad Mirza · 1 min read · 364 reads
है कितने रूप तेरे माँ जग में सबसे प्यारी तू है कितने रूप तेरे माँ
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