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Poem · Romance

गीत - गोरी का शृंगार

by Bhaurao Mahant ✓ · 26 Mar 2019

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गोरी का मुख देखकर, मन में उठे तरंग, लाल-गुलाबी प्रीत के, चढ़े अनेको रंग, बढ़ा रहे सौंदर्य को, हाय! अनूप अपार।

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गीत - गोरी का शृंगार · StoryMirror