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Poem · Others

ग़ज़ल

by Sanket Singh ✓ · 31 Jul 2017

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...एक अरसा मेरे सीने में ख़ंजर रखना. दूर रहो मर्ज़ ए इश्क़ से, समझाते हैं दुनिया के ठेकेदार, मेरी गुज़ारिश हैं उनसे, कुछ तो मेरी उमर देखना

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