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Poem · Abstract

हौसलों का परचम

by संजय असवाल "नूतन" ✓ · 7 Oct 2026

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दूर गाँव की पगडंडी पर <br>आँखों में सपने पलते थे,<br>जेब मगर खाली थी उसकी&nbsp;<br>पर हौसले दिल में चलते थे। मिट्टी की खुशबू साथ लिए

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