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Poem · Inspirational

हजार के नोट की व्यथा

by Jitendra Parashar ✓ · 29 Jul 2017

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कभी ख़्वाहिश था लोगों की अब मर चुका हूँ, उनकी नज़रो में एक योजित मौत उन गुनाहों के लिए, जो मैंने किये ही नहीं  

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हजार के नोट की व्यथा · StoryMirror